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02-03-2017
All passenger coaches of north central railway will with Bio toilet by october 2017.

उत्‍तर मध्‍य रेलवे

जनसम्‍पर्क कार्यालय

उत्‍तर मध्‍य रेलवे

इलाहाबाद

            पत्रांक: 11पीआर/03/2017 प्रेस विज्ञप्तिदिनांक: 01.03.2017

उत्‍तर मध्‍य रेलवे के सभी सवारी डिब्बे होंगे अक्‍टूबर 2017 तक बॉयो टॉयलेट युक्त

उत्‍तर मध्‍य रेलवे प्रशासन अपने सम्‍मानित यात्रियों को महाप्रबंधक श्री एम.सी. चौहान के नेतृत्‍व में उत्‍कृष्‍ट यात्री सुविधाओ के साथ-साथ स्‍वच्‍छ यात्रा पर्यावरण उपलब्‍ध कराने को निरन्‍तर प्रयासरत है। इसी क्रम में रेल गाडि़यों में प्रयुक्‍त हो रहे शौचालयों को बॉयो टॉयलेट युक्‍त करने का कार्य प्राथमिकता के तौर पर किया जा रहा है। उत्‍तर मध्‍य रेलवे में प्रयुक्‍त हो रहे सभी सवारी डिब्‍बो में आगामी अक्‍टूबर 2017 तक बॉयो टॉयलेट लगा दिये जायेंगे। इसके उपरान्‍त उत्‍तर मध्‍य रेलवे के कोई भी यात्री गाड़ी बिना बॉयो टॉयलेट के नहीं होगी। अब तक 499 यात्री डिब्‍बो में बॉयो-टॉयलेट फिट करते हुए कुल 1608 बॉयो टैंक लगा दिये गये हैं एवं जो भी नये डिब्‍बे अब कारखानो से आ रहे हैं वो सभी भी बॉयोटॉयलेटयुक्‍त है।

स्‍वच्‍छ भारत अभियान को रेल पटरियों पर साकार करने के लक्ष्‍य में बॉयो टॉयलेट एक अति‍ महत्‍वपूर्ण कदम है। परम्‍परागत शौचालयों में गन्‍दगी रेल पटरियों पर गिरती थी एवं रेल मार्ग के साथ-साथ स्‍टेशनो के प्‍लेटफार्मो पर भी रेल ट्रैक अत्‍यधिक गंदे हो जाते हैं। बड़े स्‍टेशनों पर जहां धुलनीय एप्रन है वहां तो इनकी साफ-सफाई आसानी हो जाती है किन्‍तु अन्‍य स्‍थानों पर सफाई कठिन कार्य है। इन बॉयो टॉयलेटो के लग जाने से रेलवे ट्रैक की स्‍वच्‍छता सुनिश्चित की जा सकेगी। बॉयो टॉयलेटो में प्रयुक्‍त होने वाले बॉयो टैंको में एनारोबिक बैक्‍टीरिया होता है। यह बैक्‍टीरिया मल को गैस एवं तरल रूप में परिवर्तित कर देता है एवं टैंक में ही इससे निकलने वाले तरल पदार्थ को क्‍लोरिनेट कर दिया जाता है, जिससे यह तरल पदार्थ बैक्‍टीरिया रहित हो जाता है एवं इससे किसी जीवित प्राणी एवं रेल पटरियों के लिए यह नुकसान रहित होता है।

इसके अतिरिक्‍त इस शौचालय व्‍यवस्‍था में कोई बदबू भी शौचालय में शेष नहीं रहती है। यह तकनीक भारतीय रेल एवं डीआरडीओ द्वारा विकसित की गयी है। इस संबंध में अपने सम्‍मानित यात्रियों से आग्रह है कि बॉयो टॉयलेट में कोई बोतल, प्‍लास्टिक पैकेट, गुटका आदि के पाउच न डाले इससे यह टॉयलेट चोक हो सकता है। इस शौचालय के संबंध में आम जन को जागरूक करने के उद्देश्‍य से इलाहाबाद, ग्‍वालियर एवं आगरा स्‍टेशनों पर इनके मॉडल का प्रदर्शन किया गया है। साथ ही इनसे होने वाले एफलुएन्‍ट डिस्‍चार्ज के संबंध में बॉयो टॉयलेट लैब की स्‍थापना भी इलाहाबाद, ग्‍वालियर एवं आगरा डिपो में की गयी है।





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