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23-10-2024
प्रयागराज जंक्शन स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) चालू


अत्यंत व्यस्त नई दिल्ली-हावड़ा रूट पर निर्बाध और सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए 825 रूटों की ईआई की गई स्थापित

उत्तर मध्य रेलवे ने 20.10.24 को प्रयागराज जंक्शन यार्ड रीमॉडलिंग और प्रयागराज जंक्शन-प्रयागराज रामबाग दोहरीकरण कार्य के संबंध में नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की स्थापना करके महाप्रबंधक उत्तर मध्य रेलवे श्री उपेंद्र चंद्र जोशी के नेतृत्व में एक और उपलब्धि हासिल की। प्रयागराज उत्तर मध्य रेलवे का दूसरा सबसे बड़ा यार्ड है। प्रयागराज जंक्शन स्टेशन पर क्योसन निर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग चालू की गई है, जिससे ट्रेन संचालन में बेहतर फ्लेक्सबिलिटी के लिए 825 रूट उपलब्ध होंगे। नई इंटरलॉकिंग से संरक्षायुक्त और निर्बाध ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

आज दिनांक 21.10.2024 को उत्तर पूर्व सर्किल के रेल संरक्षा आयुक्त श्री प्रणजीव सक्सेना ने नवनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और नव दोहरीकृत प्रयागराज-प्रयागराज रामबाग खंड का निरीक्षण किया। सुबह सबसे पहले उन्होंने प्रयागराज के मंडल रेल प्रबंधक श्री हिमांशु बडोनी और अन्य मंडल अधिकारियों के साथ-साथ जोन के निर्माण संगठन और रेल विकास निगम लिमिटेड जैसी कार्यकारी एजेंसियों के अधिकारियों के साथ परियोजना और इसके चालू होने के बारे में चर्चा की। इसके बाद नवनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का निरीक्षण और निरंजन ब्रिज का स्थलीय निरीक्षण किया गया। त्तदोपरांतउन्होंने प्रयागराज से प्रयागराज रामबाग तक मोटर ट्रॉली निरीक्षण किया और अंत में उन्होंने प्रयागराज रामबाग और प्रयागराज के बीच स्पीड ट्रायल किया।

नई इंटरलॉकिंग की स्थापना इस बहुत ही महत्वपूर्ण और रणनीतिक रूप से स्थित स्टेशन के विकास के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने 1859 में ट्रेन संचालन के लिए उत्तर भारत के पहले स्टेशन के रूप में राष्ट्र की सेवा में अपनी यात्रा शुरू की थी। तब से यह स्टेशन दिल्ली-हावड़ा और हावड़ा-मुंबई मार्गों के बीच की कड़ी के रूप में काम करता है और यहाँ से निकलने वाले बहु दिशात्मक यातायात को सुगम बनाता है। वर्तमान रूट रिले इंटरलॉकिंग 1993 से काम कर रही थी और 30 साल से अधिक पुरानी थी। नई इंटरलॉकिंग आगामी और उसके बाद के भविष्य के कुंभ मेलों तथा आगामी निरंतर बढ़ते यातायात को सुचारु एवं अतिरिक्त परिचालन  क्षमता की उपलबधता सुनिश्चित हो सकेगी। 

सिग्नल एवं दूरसंचार, सिविल इंजीनियरिंग, विद्युत एवं परिचालन के लगभग 500 अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस अत्यंत बड़े और जटिल ढांचागत कार्य को एक परिपक्व योजना और सटीक कार्यान्वयन के साथ पूरा करने के लिए बहुत निष्ठा और लगन से काम किया।

इस जटिल कार्य में 20 लाइनें, 206 सिग्नल (58-मुख्य, 95 शंट सिग्नल, 53-कॉलिंग सिग्नल), 172  पॉइंट मशीन शामिल थे। संचालन, स्टैंड बाई और रखरखाव के उद्देश्य से प्रत्येक के लिए 03-03 सहित कुल 09 विजुअल डिस्प्ले यूनिट प्रदान किए गए। इस कार्य से कार्यकुशलता में भी वृद्धि होगी और वाराणसी, लखनऊ, दीनदयाल उपाध्याय और सतना जाने वाली ट्रेनों के लिए विलंबन समय में कमी आएगी। 

इस कार्य से ट्रेनों की आवाजाही में लचीलापन भी बढ़ेगा। ट्रेनों की एक साथ आवाजाही संभव होगी, यानी प्रयागराज रामबाग से प्रयागराज जंक्शन पर लाइन नंबर 11 पर रिसेप्शन और लाइन नंबर 10 से नैनी के लिए प्रस्थान। इससे लाइन नंबर 1-8 से प्रयाग तक डिस्पैच संबंधी समस्याएं भी हल हो जाएंगी और प्रयागराज जंक्शन की लाइन नंबर 18 और 19 से ट्रेनों को उत्तर रेलवे के प्रयाग जंक्शन स्टेशन पर रवाना किया जा सकेगा। इससे प्रयाग स्टेशन से प्रयागराज जंक्शन की लाइन नंबर 13-17 पर भी ट्रेनों का रिसेप्शन हो सकेगा। इससे प्रयागराज यार्ड में रनिंग लाइनों की उपलब्धता भी बढ़ेगी। 

यह नॉन इंटरलॉकिंग कार्य प्रयागराज जंक्शन यार्ड रीमॉडलिंग के पहले चरण का प्रमुख हिस्सा है, जिस के तहत प्रयागराज रामबाग और प्रयागराज के बीच नई अतिरिक्त लाइन का प्रावधान, प्रयागराज-प्रयाग अप और डाउन लाइन के बीच एक नया क्रॉस ओवर डालना, प्रयागराज की लाइन नंबर 1 से 8 तक प्रयाग के लिए ट्रेन मूवमेंट, सिविल लाइन की तरफ निरंजन पुल का विस्तार, निरंजन पुल पर डाउन यार्ड से मलाका शंटिंग नेक का बचा हुआ कनेक्शन ताकि सुचारू शंटिंग हो सके और प्रयाग की ट्रेनों को रोकना ना पड़े, प्रयाग और प्रयागराज रामबाग से एक साथ आवाजाही के लिए सिंगल स्लिप को डबल स्लिप डायमंड क्रॉसओवर नंबर 277 में बदलना, इंजन लाइन सं.9 और 12 को कोचिंग फिट रनिंग लाइनों में परिवर्तित करना, पूर्ण कोचिंग रेक को समायोजित करने के लिए ब्रांच वाशिंग और स्टेबलिंग लाइन का विस्तार, लाइन सं.27 (पीएफ सं.6) और लाइन सं.18 और 19 (प्लेटफॉर्म सं.9 और 10) पर एक साथ मूवमेंट की सुविधा के लिए लाइन सं.27 (प्लेटफॉर्म सं.6) के हावड़ा छोर में रेत की गांठ का प्रावधान, एआरएमई और एआरटी लाइनों के दोनों तरफ सिग्नलिंग मूवमेंट  का प्रावधान, इंजन लाइन को एआरएमई लाइन में और एआरएमई लाइन को क्रेन शेड सुविधा के साथ क्रेन लाइन में परिवर्तित करके एआरटी लाइन के पास क्रेन लाइन और क्रेन शेड का प्रावधान, अधिक इलेक्ट्रिक लोको को समायोजित करने के लिए एक डीजल शेड लाइन को इलेक्ट्रिक लोको शेड लाइन से जोड़ना, सुरक्षित मूवमेंट के लिए शॉर्ट साइडिंग की ट्रैक सर्किटिंग और सिविल लाइन की तरफ लाइन शाह बाबा फुट ओवर ब्रिज  का विस्तार सक्षम करना शामिल है ।


(Dr. Amit Malaviya)
Sr. PRO




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